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NISHTHA प्रशिक्षण क्या है और क्यों आवश्यक है शिक्षकों के लिए?

NISHTHA प्रशिक्षण क्या है और क्यों आवश्यक है शिक्षकों के लिए?

NISHTHA यानी National Initiative for School Heads' and Teachers' Holistic Advancement (NEP 2020 के अंतर्गत लागू) एक राष्ट्रीय‑स्तरीय शिक्षक क्षमता‑निर्माण मिशन है। यह Samagra Shiksha के तहत 2019–20 से भारत में लागू है—एक बड़े पैमाने पर संचालित राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, जो विद्यार्थियों के learning outcomes में सुधार लाने हेतु शिक्षक‑नेताओं को जोड़ने वाला सबसे बड़ा प्रयास है।  यह लगभग 42 लाख शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को नियुक्त करता है, और इसे “दुनिया का सबसे बड़ा teacher‑training programme” कहा जाता है। 

🎯 उद्देश्य और प्रशिक्षण संरचना

  • प्रमुख उद्देश्य: critical thinking, competency‑based learning, learner‑centered pedagogy, school leadership, inclusion, art‑integrated learning, स्वास्थ्य एवं well‑being, ICT जैसा उच्च‑स्तरीय शिक्षण गुण तैयार करना। 
  • Module-Based Training: इसमें 18 interactive, activity‑based मॉड्यूल शामिल हैं—जैसे ‘School-Based Assessment’, ‘Art‑as‑Pedagogy’ और ‘Inclusive Education’ आदि। 
  • पहाड़प्रशिक्षण व्यवस्था: NCERT/NIEPA से चयनित 120 National Resource Persons के तहत, 33,120 Key और State Resource Persons देश भर में प्रशिक्षित करते हैं। SRPs/KRPs अपनी राज्य‑टीमों को प्रशिक्षित करके शिक्षकों तक पहुंचाते हैं। 
  • ऑनलाइन शिक्षण माध्यम: NCERT द्वारा विकसित MOODLE‑based Learning Management System और DIKSHA‑app का उपयोग करके दूरस्थ शिक्षण, impact analysis, mentoring और progression analytics संभव बनाया गया है। 

🔧 NISHTHA किस प्रकार शिक्षण शक्ति को बदलता है?

NEP 2020 में कहा गया है कि हर शिक्षक को सालाना कम से कम 50 घंटे का Continuous Professional Development (CPD) लेना चाहिए—जिसमें FLN‑based pedagogy, competency-based assessment, experiential learning, arts‑integration का समावेश हो। NISHTHA इसी लक्ष्य को पूरा करते हुए शिक्षकों की पेशेवर योग्यता बढ़ाता है—विशेषतः प्राथमिक शिक्षा में।

🌱 लाभ: शिक्षकों और छात्रों पर सकारात्मक प्रभाव

  • ✔️ शिक्षण पद्धति रोचक और छात्रों‑केंद्रित होती है—rote learning से हटकर प्रतिस्पर्धात्मक thinking, creativity और collaboration को बढ़ावा मिलता है। 
  • ✔️ विद्यार्थी holistic तरीके से विकसित होते हैं—art‑integration, school‑based assessment और personal‑social skills की वजह से। 
  • ✔️ शिक्षकों में आत्म‑विश्वास और शैक्षिक नेतृत्व की क्षमता बढ़ती है—जो उन्हें स्कूल प्रमुखों या first‑level counsellors के रूप में बना सकता है। 
  • ✔️ digital literacy और ICT‑tools के प्रयोग की सक्षमता बढ़ती है— जिससे blended, hybrid, और virtual classrooms अधिक सक्षम होते हैं।

⚠️ चुनौतियाँ और सुधार की आवश्यकता

  • 👩‍💻 **डिजिटल विभाजन**: कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में connectivity, device और data की कमी व्यवधान उत्पन्न कर रही है—जिससे course completion धीमा होता है। 
  • 📚 **मानकीकरण और Contextualisation**: राज्य‑स्तरीय SCERT/DIET को स्थानीय मूलभूत और भाषाई विविधताओं को लागू करने में सहायक सामग्री की आवश्यकता होती है। 
  • 🧍**Teacher Acceptance**: शैक्षिक संस्थाओं में mindset shift लाना आसान नहीं है—teachers को इन‑service training मे सहयोग, mentoring या समय देने की जरूरत होती है।
  • 📊 **प्रभाव मूल्यांकन**: शिक्षकों के प्रशिक्षण के बाद student outcomes में स्पष्ट सुधार दिखाना अभी बाक़ी है—पर राज्य‑स्तर की सर्वेक्षण रिपोर्ट सकारात्मक हैं।

🔮 समग्र दृष्टिकोण

NISHTHA सिर्फ एक प्रशिक्षण प्रोग्राम नहीं है—it’s a paradigm shift in teacher education. यह शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कैसे बच्चों की thinking, curiosity और creativity को बढ़ाया जाए—समकालीन तकनीक, inclusive classroom design और NEP‑defined pedagogical shifts के ज़रिये। जब शिक्षक सशक्त, informed और आत्म‑स्फूर्त प्रशिक्षित होंगे, तभी विद्यार्थी साधारण पाठ्यक्रम से परे critical, ethical, and holistic thinkers बन सकेंगे।

✅ निष्कर्ष

NISHTHA प्रशिक्षण शिक्षकों को चिर‑परिचित traditional teaching से हटाकर, समृद्ध, मानव‑केंद्रित और परिणाम‑आधारित शिक्षण शैली से जोड़ता है। यह NEP 2020 की भावना के अनुरूप, learning outcomes पर जोर डालता है और शिक्षक‑केंद्रित प्रशिक्षण को नई ऊँचाइयों तक ले जाता है। शिक्षकों को चाहिए कि वे न केवल NISHTHA training पूरा करें, बल्कि शिक्षण व्यवहार में इन नए दृष्टिकोणों को स्थायी रूप से अपनाएँ—ताकि हर विद्यार्थी की पूरी क्षमता सामने आए और भारत की शिक्षा यात्रा सशक्त हो सके।

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