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Artificial Intelligence, Robotics & Coding in CBSE Schools

🤖 Artificial Intelligence, Robotics & Coding in CBSE Schools

“जब बच्चे स्क्रीन को छूकर नहीं, बल्कि कोड लिखकर सीखने लगते हैं—वहीं भविष्य के निर्माण की शुरुआत होती है।” CBSE ने NEP 2020 की दृष्टि से तकनीकी शिक्षा को पाठ्यक्रम का सामान्य हिस्सा बनाया है, ताकि हर छात्र इक्विटी के साथ भविष्य-तैयारी कर सके।


1. 📘 CBSE की नवीन पहल: AI, Coding और Data Science कक्षा VI से

मई 2023 में CBSE ने घोषणा की कि अब कक्षा VI‑VIII में Artificial Intelligence, Coding और Data Science को 12‑15 घंटे के मॉड्यूल के रूप में पढ़ाया जाएगा—जिसमें 70 % समय हाथों‑हाथ गतिविधियों और 30 % सैद्धांतिक शिक्षा के लिए आवंटित है। कोर्स मूलतः Microsoft, IBM और अन्य तकनीकी संस्थानों की सहायता से डिजाइन किया गया है, जिससे computational thinking और design mindset को प्राथमिकता दी जाती है।

CBSE की रणनीति AI को सिर्फ विषय न मानकर—एक interdisciplinary कौशल के रूप में शामिल है, जिसका प्रयोग विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, भाषा, अभियांत्रिकी और व्यावहारिक विषयों में किया जा सकता है।


2. 🛠 विद्यालयों में Robotics: Kerala से Delhi तक कदम

केरल सरकार ने कक्षा X के ICT पाठ्यक्रम में “The World of Robots” अध्याय जोड़कर 4.3 लाख छात्रों को रोबोटिक्स से परिचित कराया है—जिसमें Arduino, IR sensor और Pictoblocks जैसी तकनीकों के प्रयोग शामिल हैं। 29,000 रोबोट किट्स वितरित किए गए और लगभग 9,924 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।

दिल्ली ने गुजरात के मॉडल की तर्ज पर शहर की सरकारी स्कूलों में AI, Robotics Labs और Smart Boards की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है—शौराब का उद्देश्य छात्रों को hands-on डिजिटल कौशल से लैस करना है।


3. 🔬 Atal Tinkering Labs & e-Yantra Robotics Labs in CBSE Schools

ATAL Innovation Mission के तहत बनने वाले 10,000 से अधिक Atal Tinkering Labs (ATLs) ने Class VI‑XII को robotics, 3D‑printing, IoT और coding की सुविधा दी है। इन प्रयोगशालाओं में students design thinking, teamwork और महीन विचारों से prototypes बनाते हैं। सीनियर वैज्ञानिकों का कहना है कि इन स्कूलों से निकले कई student innovators Startups की ओर बढ़ रहे हैं।

IIT Bombay की e‑Yantra initiative ने भी कई CBSE स्कूलों में FOSS‑based robotics प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध करवाए—जिससे विद्यार्थी अपने शहर की कृषि, smart‑home और स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समाधान बना रहे हैं।


4. 🎓 छात्र‑कथा: AI समर कैंप से शुरू Innovation की राह

जून 2025 में Times of India द्वारा आयोजित 10‑दिने AI Summer Camp में Classes VI‑XII के छात्रों ने songs, stories, space‑simulators और school‑website स्वयं डिजाइन किए। छह students ने राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीता—मोटर, drone‑simulation और data‑driven क्षेत्र में उनके विचार संगणकीय थे।

ऐसी गतिविधियाँ छात्रों में ownership कौशल और creative confidence विकसित करती हैं—जो Robotics labs और classroom coding से सीधे जुड़ी होती हैं।


5. 👩‍🏫 शिक्षक प्रशिक्षण और टेक्नो-लर्निंग संसाधन

Kerala Infrastructure & Technology for Education (KITE) ने Navy Children School Kochi जैसे CBSE संस्थानों में IT Club के माध्यम से coding और AI edukation की शुरुआत की है। शिक्षकों को digital teaching practices, FOSS‑based tools और STEM pedagogy में प्रशिक्षित किया गया है।

इसके अलावा CBSE ने AI facilitator handbook और AI/TISC‑trained trainers की व्यवस्था रखी है, जिससे coding शिक्षक और जनरल विषय शिक्षक दोनों तकनीकी शिक्षा में सक्रिय रूप से part‑take कर सकें।


6. 🧩 माता‑पिता और विद्यार्थी के लिए सुझाव

  • सत्यापित करें: क्या स्कूल में AI‑Coding module चल रहा है? कक्षा VI–VIII में कितने घंटे hands-on लैब हैं?
  • Coding Club देखिए: क्या स्कूल में ATL, Robotics या Coding Club है? वह कितनी frequency meet होता है?
  • Teachersओंजिट प्रोग्राम देखें: शिक्षकों को AI‑training प्राप्त हुई है? Google classroom, GitHub integration आदि वर्कफ्लो कैसा है?
  • Project Showcase करें: छात्रों के project, drone, smart‑sensor या AI‑demo को PTM/PTA में सार्वजनिक करें। Community feedback प्रोत्साहन देता है।

🎯 निष्कर्ष: जब स्कूल आगे बढ़े, विद्यार्थी आत्मनिर्भर बने

AI, Robotics और Coding केवल विषय नहीं—यह वे Foundations हैं जिनके ऊपर students analytical minds, inventive spirits और STEM competence को आकार लेते हैं। यदि स्कूल तकनीकी साधन प्रदान करे, शिक्षक प्रशिक्षित हों, विद्यार्थी उत्साहित हों—तो शिक्षा सिर्फ श्रेणी नहीं, एक अनंत voyage बन जाती है।

“जहाँ बच्चे को code से नहीं, code के साथ सोचना आता है—वहीं शिक्षा वास्तव में गतिशील होती है।”


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