PARAKH संस्था क्या है और इसका मूल्यांकन प्रणाली में क्या योगदान है?
PARAKH संस्था क्या है और इसका मूल्यांकन प्रणाली में क्या योगदान है?
PARAKH का पूरा नाम है Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development. यह भारत सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली एक स्वतंत्र संस्थाऽ है, जिसकी स्थापना 8 फ़रवरी 2023 को NCERT द्वारा की गई थे (परंतु कैबिनेट की मंजूरी 2020 में ही पारित हुई) – यह NEP 2020 की धारा 4.41 के तहत एक राष्ट्रीय मानक‑निर्धारण संस्था के तौर पर सामने आई ।
📌 PARAKH के कार्य और प्रमुख जिम्मेदारियाँ
- सम्पूर्ण रूप से **स्कूली मूल्यांकन के लिए मानक एवं दिशानिर्देश** तय करना, ताकि विभिन्न बोर्डों के बीच मूल्यांकन मानकों में असमानता (equivalence gap) न रहे ।
- NEP के अनुरूप **Competency‑Based Assessment** को बढ़ावा देना; इसमें घरेलू और राज्य बोर्डों को प्रशिक्षण, सलाह और प्रश्न‑निर्धारण ब्लूप्रिंट प्रदान करना शामिल है ।
- अब तक चलती आई National Achievement Survey (NAS) का स्थान लेते हुए, PARAKH ने **PARAKH Rashtriya Sarvekshan 2024** शुरू किया—जिसमें पूरे स्कूल स्तर, विषय, और प्रशासनिक प्रसंगों को ध्यान में रखते हुए competency‑based मूल्यांकन किया गया ।
- राज्यों में **प्राप्तियों की ट्रैकिंग (State Educational Achievement Survey-2023)** का आयोजन और विश्लेषण, जिसमें सैंपल‑आधारित large‑scale assessment किया जाता है ।
🖼️ Holistic Progress Card (HPC): 360‑डिग्री मूल्यांकन
PARAKH ने Foundation से Secondary स्तर (कक्षा 1 से 8 तक) के लिए **Holistic Progress Card (HPC)** विकसित किया, जो पारंपरिक marksheet से परे चलता है—यह विद्यार्थियों की academic, co‑curricular activities, values & life‑skills जैसे पहलुओं का multidimensional मूल्यांकन करता है । अब तक कुल 26 राज्यों/यूटी ने इस HPC ढांचे को अपनाया है (CBSE भी शामिल है), और प्रत्येक छात्र को beginner, intermediate, proficient या advanced स्तर पर वर्गीकृत किया जाता है, जिससे शिक्षकों और अभिभावकों को सटीक निगरानी और सुधार की राह मिलती है ।
📐 मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के उपाय
- PARAKH ने **question paper blueprint और teacher‑paper‑setter cadre** जैसे सहभाग टीमों का सुझाव दिया है, जिससे परीक्षा की समानता बनी रहती है। कुछ स्रोतों के अनुसार “state boards should train a cadre of professional paper setters” जैसे सुझाव PARAKH की रिपोर्ट में शामिल हैं ।
- NCERT और राज्य प्रशिक्षकों द्वारा PARAKH के सहयोग से **Project Vidyasagar**, DIKSHA‑FLN Portal, और अन्य प्रशिक्षण‑कार्यशालाएँ चलाई जा रही हैं, जिसमें छात्र‑केंद्रित assessment प्रक्रियाओं को मानकीकृत किया जा रहा है ।
📊 PARAKH के मूल्यांकन के मानव स्तर पर असर
- समग्र सर्वेक्षणों (Sarvekshan 2024/SEAS 2023) से पता चला है कि उत्तर प्रदेश सरकार के विद्यार्थियों ने Foundational स्तर (कक्षा 3) का मूल्यांकन में 74% प्रदर्शन किया—जो निजी स्कूल वालों के 64% से बेहतर था, और राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ दिया, लेकिन कक्षा 6 एवं 9 में प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से नीचे पाया गया ।
- MAHARASHTRA में PARAKH रिपोर्ट (2024) के अनुसार 90% से ज़्यादा स्कूलों में experiential learning (sports, cultural, creative) को अपनाया गया है—यह shift स्पष्ट रूप से holistic मूल्यांकन प्रणाली की दिशा में कदम है ।
🌍 क्यों PARAKH है एक game‑changer?
- 📌 मूल्यांकन संवादात्मक हो गया — अब विद्यार्थी की रट्टा-ज्ञान की बजाय ज्ञान पर आधारित मूल्यांकन होता है।
- 🎯 यह मूल्यांकन से आगे बढ़कर परिणाम‑आधारित पहचान करता है—student को कहाँ stand करता है, आगे कार्य कौन‑सा?
- 🧩 विभिन्न बोर्डों के विद्यार्थियों के बीच equivalence सुनिश्चित करता है—कला, विज्ञान या राज्य/केन्द्रीय बोर्ड भिन्न हों, मगर मानकीकृत तौर पर comparison संभव हो सके।
- 📄 पॉलिसी‑निर्माताओं और राज्यों को data‑driven feedback मिलता है—सेक्टरगत निर्णय बेहतर होता है।
⚠️ चुनौतियाँ और आगे का मार्ग
- ❗ Infrastructure gap और digital प्लेटफ़ॉर्म उपयोग की कमी बहुत जिलों में निर्वहन पर असर डाल रही है।
- 👩🏫 Teacher training में विविधता—हर SCERT/DIET हर शिक्षक को इस मूल्यांकन संस्कृति से परिचित कराने में सक्षम नहीं हुआ है।
- 🔄 Implementation में state‑level अनियमितताएँ—एक समान बजट, मानक और monitoring mechanisms की कमी विषय‑विशेष अनुभवों में reflect होती है।
- 🔒 Data‑privacy और PARAKH के तहत गुणवत्ता एवं ethics का संरचनात्मक निगरानी होना आवश्यक है।
✅ निष्कर्ष
PARAKH केवल एक नई संस्था नहीं—यह इक ऐसा राष्ट्रीय बदलाव है जो मूल्यांकन प्रणाली को marks एवं ज्ञान से ऊपर उठाकर **holistic**, **competency‑based**, और **equitable** मूल्यांकन कक्षाओं में मोड़ रही है। इसके माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी केवल अंक नहीं, बल्कि वास्तविक क्षमता, सृजनात्मकता, जीवन कौशल एवं भावनात्मक विकास से जगा‑जागरूक बन रहा है। यदि यह मिशन सफलता पूर्वक सभी राज्यों एवं शिक्षण संस्थानों तक पहुंचे, तो यह भारतीय शिक्षा के लिए paradigm shift साबित हो सकता है।
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