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Gender Equity in Education: शिक्षा में लैंगिक समानता की पहलें

🌸 Gender Equity in Education: शिक्षा में लैंगिक समानता की पहलें

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा में भारत ने बहुत आगे बढ़कर लगभग बराबरी हासिल की है—लेकिन शिक्षा का वास्तविक अर्थ केवल उपस्थिति से नहीं, बल्कि समान अवसर और समावेश से है। UDISE+ (2021‑22) के आंकड़ों के अनुसार विद्यालयी population में लड़कियों की भागीदारी 48 % थी; उच्च शिक्षा में महिलाएं GER 28.5 % तक पहुँच चुकी हैं, जो कि पुरुषों से थोड़ा अधिक है। हालांकि secondary स्तर पर drop‑out और STEM संयोजन में girls कमियाँ हैं।

लेकिन अभी तक पुराना सोच—early marriage, transport की कमी या sanitation समस्या— लड़कियों की शिक्षा यात्रा में बाधक बनी हुई हैं। इसे दूर करने के लिए सरकार, समुदाय और शैक्षिक संस्थान मिलकर कई योजनाओं और बदलावों को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं।


💡 सरकारी उठाए गए मुख्य कदम

1. Beti Bachao, Beti Padhao (BBBP)

  • लिंगानुपात सुधार के साथ-साथ किशोरी स्कूल प्रवेश और retention पर ध्यान केंद्रित है।
  • Jharkhand में अब तक child marriage में 5.7 % की गिरावट आई — NFHS‑5 ने 32.2 % रेट बताया, जो पुरस्कार व वित्तीय सहायता के कारण संभव हुआ। BBBP द्वारा संचालित गतिविधियों की संख्या 50,000 से अधिक पहुंच चुकी हैं।

2. Samagra Shiksha & Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya (KGBV)

  • Samagra Shiksha योजनायें पूरे स्कूल शृंखला में girls को मुख्यधारा में समाहित करने का प्रयास करती हैं—रैंप, separate toilets, sanitary pad dispensers, transport support आदि के माध्यम से।
  • KGBV में गुणवत्तापूर्ण residential शिक्षा SC/ST/OBC/लागत‑पारिवारिक girls के लिए उच्च प्राथमिक स्तर से उपलब्ध होती है। अब तक 2,578 ऐसे स्कूल स्थापित किए जा चुके हैं।

3. National Scheme of Incentive to Girls for Secondary Education (NSIGSE)

  • SC/ST समुदाय की लड़कियों को class IX में प्रवेश के बाद ₹3,000 की fixed deposit दी जाती है, जिसे वे class X उत्तीर्ण होने और 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद interest सहित निकाल सकती हैं।

4. CBSE की 'Udaan Campaign'

  • CBSE की Udaan योजना 1,000 disadvantaged लड़कियों को वार्षिक रूप से IIT‑JEE और विज्ञान-संख्याओं के लिए free study material, virtual tutorials और helpline उपलब्ध कराती है।
  • 2017 में इस कार्यक्रम से 135 लड़किया JEE‑Main पास करने में सफल हुई थी।

5. Mahila Samakhya Programme & Grassroots interventions

  • 1986 से ग्रामीण महिलाओं को शिक्षा और जागरूकता हेतु संगठित करने का यह पहल, ग्राम स्तरीय sanghas के माध्यम से girls की schooling और बेटी‑सशक्तिकरण को मजबूत करता है।
  • कर्नाटक और केरल जैसे राज्य अब भी Mahila Samakhya को state‑funded रूप में जारी रख रहे हैं।

6. असम की 'Nijut Moina' योजना

  • बचपन की शादी रोकने हेतु Class XI‑XII लड़कियों को ₹1,000/माह, यूजी को ₹1,250 और PG को ₹2,500/माह तक की stipend प्रदान की जाती है, बशर्ते वे नियमित शिक्षा और शादी (21+) की शर्तों को मानें। इस पहल का उद्देश्य 2026 तक child marriage समाप्त करना है।

⚠️ चुनौतियाँ लगातार बनी हुई हैं

  • Secondary school dropout—विशेष रूप से puberty और household कार्यभार के कारण girls अक्सर Class VIII तक schooling छोड़ देती हैं।
  • STEM में girls की भागीदारी अभी भी कम है—gender stereotyping व career guidance की कमी इसका मुख्य कारण है।
  • Sanitation रख-रखाव विधायी तो है लेकिन maintenance का अभाव बालिकाओं की attendance को प्रभावित करता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में female teacher shortage व transport सुविधा की कमी अब भी बाधा बनी हुई है।

🧭 अभिभावकों और छात्रों के लिए सुझाव

  • स्कूल से पूछें—क्या वहाँ separate toilets, menstrual hygiene facilities, सुरक्षा उपाय (e.g., CCTV, वुमेन सेफ्टी कैमप) उपलब्ध हैं?
  • क्या KGBV, Udaan या NSIGSE जैसे स्कीम में आवेदन किया जा सकता है? निकलने वाले students scholarships के लिए समय पर आवेदन करें।
  • Community‑level संवाद और SMC/PTA में शामिल हों ताकि school governance में girls’ issues पर संवाद हो सके।
  • अपने क्षेत्र में non-profit जैसे Educate Girls की activities (Team Balika) के चलते क्या अधिक लड़कियाँ वापस स्कूल आ रही हैं—इसकी जानकारी रखें।
  • यदि लड़कियों को STEM में भागीदारी बढ़ानी है, तो Udaan जैसे resources, mentoring camps या science fair registration में उन्हें समर्थन दें।

✨ निष्कर्ष: शिक्षा में लिंग संतुलन लोकतंत्र की नींव है

जहाँ शिक्षा केवल पठन-पाठन मात्र नहीं, बल्कि अवसर, सुरक्षा और समावेश से जुड़ी होती है, वहीं gender equity नीतियाँ केवल अवसर प्रदान नहीं करतीं—बल्कि वे समाज की आत्मा परिवर्तन की एक प्रवक्ता हैं। जब लड़की स्कूल में सुरक्षित रहती है, शिक्षित होती है और आगे बढती है, तभी राष्ट्र सशक्त होता है।

“जब लड़कियाँ सबल होंगी, तभी विकास की गति में गति आएगी।”

CBSE Official Website

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